Saturday, 20 Oct 2018

रेलवे में नौ फर्जी डॉक्टरों के नाम पर लाखों रुपए उड़ाए

रेलवे में नौ फर्जी डॉक्टरों के नाम पर लाखों रुपए उड़ाए
Richa Gupta / Ajay Singh, southdelhinews.com
उत्तर रेलवे के चेम्सफोर्ड रोड के पास बने केंद्रीय अस्पताल में नौ फर्जी रेजिडेंट डॉक्टरों के नाम पर लाखों रुपए का वेतन निकाले जाने का मामला सामने आया है। इन फर्जी डॉक्टरों के नाम पर टीए, डीए व कई अन्य तरह के भत्ते भी खाता खोल कर निकाल लिए गए। प्राथमिक जांच में पाया गया है कि लगभग पिछले दो सालों से इन डॉक्टरों के नाम पर पैसे निकाले जा रहे थे।
दरअसल रेलवे की ओर से रेल कर्मियों के वेतन व अन्य भत्तों के भुगतान के लिए एक नया सॉफ्टवेयर प्रयोग किया जा रहा है। उत्तर रेलवे की ओर से हाल ही में ऐसे सभी कर्मचारियों की लिस्ट तैयार की गई जिनका वेतन व भत्तों के आधार पर काफी इनकम टैक्स बनता है। साथ ही इन्हें किए जाने वाले भुगतान में संदेह उत्पन्न होता था। इसी के तहत सोमवार को रेलवे की एक टीम ने सेंट्रल अस्पताल के इन नौ डॉक्टरों के रिकॉर्ड की जांच शुरू की। रिकॉर्ड की जांच करने पर पता चला कि ये डॉक्टर अस्पताल में कभी नियुक्त ही नहीं हुए।
इसके बाद घोटाले में शामिल होने के आरोप में रेलवे की ओर से तत्काल प्रभाव से इन डॉक्टरों का वेतन बनाने वाले रेल कर्मी को निलंबित करने के साथ इसके इंचार्ज को स्थानांतरित कर दिया। रेलवे की ओर से मामले की जांच सतर्कता विभाग को सौंप दी गई है। वहीं, इस मामले में पहाड़गंज थाने में एक शिकायत दी गई है। इस घोटाले में रेलवे के कई अन्य अधिकारियों के भी शामिल होने की आशंका है।
रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार एक रेजिडेंट डॉक्टर को रेलवे की ओर से वेतन के तौर पर करीब 70 से 80 हजार रुपये हर महीने भुगतान किए जाते हैं। ऐसे में संभावना जतायी जा रही है कि नौ डॉक्टरों को दो वर्ष में लगभग 1.7 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।
उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी नितिन चौधरी ने कहा कि रेलवे इस मामले को गंभीरता से ले रहा है। दोषियों पर सख्त एक्शन होगा। इस घोटाले की सही से जांच हो इसके लिए भी कई तरह के कदम उठाए जा रहे हैं।
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