कुतुबमीनार परिसर में दस साल बाद शुरू होगा सरंक्षण कार्य

कुतुबमीनार परिसर में दस साल बाद शुरू होगा सरंक्षण कार्य
विश्व धरोहर कुतुबमीनार में लगभग दस साल के बाद संरक्षण कार्य शुरू होगा। वहीं परिसर स्थित सुविधाओं को बेहतर किया जाएगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग, एएसआई, ने अब संरक्षण कार्य कराने की योजना बनाई है। इसके तहत मीनार का सर्वे कर यह पता किया जाएगा कि मीनार में कौन-कौन से पत्थर खराब हैं। सर्वे के आधार पर खराब पत्थरों को निकाल कर उसी तरह के नए पत्थर तैयार कर लगाए जाएंगे। इसके अलावा कुछ स्थानो से पत्थर निकल चुके हैं। उन स्थानों को भी सर्वे के आधार पर भरा जाएगा। मीनार में खराब हो चुके पत्थर बदले जाएंगे।
एएसआई के अधिकारियों ने कहा कि यहां स्थित अलाई दरवाजे का संरक्षण भी होगा।
कुतुबमीनार पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के उन स्मारकों में शामिल है, जिनमें सालभर पर्यटकों की भीड़ रहती है। कबूतर और चमगादड़ मीनार में बड़ी सख्या में मौजूद हैं। ये मीनार के अंदर रोशनदानों से प्रवेश कर जाते हैं। ये बड़ी समस्या हैं। एएसआई इन्हें रोकने के लिए रोशनदानों को जाल लगाकर बंद करेगा।
इसके साथ ही कुतुब मीनार परिसर में निर्मित अलाई दरवाजे का संरक्षण कराया जाएगा। इस संरक्षण कार्य के लिए भी लंबे समय से जरूरत महसूस की जा रही थी। कुतुबमीनार परिसर को बेहतर किया जाएगा। सुरक्षा के लिहाज से कुतुब परिसर की दीवारों पर लोहे की ग्रिल लगाई जाएगी। परिसर में जहां भी ऊबड़ खाबड़ क्षेत्र है इसे ठीक  किया जाएगा। जिससे पर्यटकों को घूमने-फिरने में असुविधा न हो। प्रवेश द्वार और बाहर निकलने वाले द्वार को बेहतर किया जा रहा है। एएसआई का यह पहला स्मारक है, जहां पर मेट्रो रेल की तर्ज पर स्मारक में प्रवेश टोकन से होता है।
एक अधिकारी ने कहा कि  स्मारक में स्थित पुस्तक घर को पर्यटकों के बाहर निकलने वाले स्थान पर स्थापित किया जाएगा।  कुतुबमीनार, 120 मीटर ऊंची दुनिया की सबसे बड़ी ईंटों की मीनार है और फ़तेह बुर्ज के बाद यह भारत की दूसरी सबसे बड़ी मीनार है। कुतुबुद्दीन ऐबक ने 1199 में इस मीनार का निर्माण शुरू करवाया था और उसके दामाद एवं उत्तराधिकारी शमशुद्दीन इल्तुतमिश ने 1368 में इसे पूरा करवाया। कुतुबमीनार का आसपास का परिसर कुतुब कॉम्पलेक्स से घिरा हुआ है, जो यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट भी है। कुतुब मीनार में 379 सीढ़ियां हैं, और इसकी कुल ऊंचाई 72.5 मीटर है। क़ुतुबमीनार परिसर में भारत की पहली कुव्वत-उल-इस्लाम-मस्जिद, अलई दरवाज़ा और इल्तुतमिश का मक़बरा भी बना हुआ है।
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