Thursday, 16 Aug 2018

विपक्ष की राजनीति में सड़क की धूल फांकनी पड़ती है— अजय माकन

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अ​जय माकन इन दिनों कांग्रेस को दिल्ली नगर​ निगम चुनाव में विजय दिलाने के लिए दिन—रात रैली,जनसंपर्क, नुक्कड़ सभा कर रहे हैं। उनका पूरा प्रयास है कि किसी भी तरह से कांग्रेस को जीत दिलाएं। अगर ऐसा नहीं भी हो तो कांग्रेस दूसरे नंबर पर जरूर आए। तीनों नगर निगमों में कांग्रेस को कम से कम इतनी सीट जरूर मिले जिससे अजय माकन के नेतृत्व की दिल्ली में छाप नजर आए। लेकिन ठीक इसी समय कई बड़े कांग्रेस नेता दिल्ली में भाजपा का दामन थाम रहे हैं। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली और प्रदेश युवा कांग्रेस अध्यक्ष अमित शाह भी इसमें शामिल हैं। यही नहीं,पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने भी दिल्ली प्रदेश में सभी नेताओं को साथ लेकर चलने की सलाह दी है। नगर निगम चुनाव के साथ ही इन सभी मसलों पर बातचीत की 
प्रश्न: कांग्रेस को इस नगर निगम चुनाव में कहां देखते हैं। 
उत्तर: हम नगर निगम चुनाव जीत रहे हैं। हर जगह कांग्रेस प्रतयाशियों के समर्थन में बड़ी संख्या में लोग उमड़ रहे हैं। जनता समझ चुकी है कि विकास केवल कांग्रेस कर सकती है। नगर निगम में भाजपा ने कुछ नहीं किया और वहीं दिल्ली सरकार में आम आदमी पार्टी का कार्य लोग देख चुके हैं। 
प्रश्न: दक्षिणी दिल्ली में आप लगातार सक्रिय हैं। क्या सबसे अधिक उम्मीद दक्षिणी दिल्ली से है। 
उत्तर: दक्षिणी दिल्ली हमारे लिए महत्वपूर्ण है। समस्त दिल्ली हमारे लिए महत्वपूर्ण है। जहां भी पार्टी के उम्मीदवार और कार्यकर्ता आदेश करते हैं वहां पर पार्टी के लिए कार्य किया जाता है। हम सभी इलाकों में जीत रहे हैं। हमारे अधिकतर उम्मीदवार बड़े अंतर से जीतेंगे। 
प्रश्न: जनता से आप किन मुददों पर वोट मांग रहे हैं। 
उत्तर: हम जनता के मुददों पर चुनाव लड़ रहे हैं। इसमें बिजली, पानी, बस, नाली, खड़ंजे, सुरक्षा जैसे अहम मसले शामिल हैं। यह वह बिंदु है जिससे आम आदमी हर दिन दो—चार होता है और इन मसलों पर ही भाजपा— आम आदमी पार्टी ने उसे ठगा है। आप कहीं भी देखिए कूड़ा सड़क पर मिलेगा। बस गायब होती जा रही हैं। सड़कें टूटी हुई हैं। कहने को बिजली पानी का बिल नहीं लगता है लेकिन इसका लाभ किसे मिल रहा है। स्वास्थ्य सेवाएं ठप हो रही है। गरीब आदमी इलाज तक नहीं करा सकता है। यही हमारे मुददे हैं। जनता हमारे साथ है कि उनकी आवाज कांग्रेस उठा रही है। दिल्ली सरकार और भाजपा की नूराकुश्ती से जनता परेशान हो चुकी है। 
प्रश्न: लेकिन आपके यह मुददे क्या प्रधानमंत्री और भाजपा अध्यक्ष के आगे चल पाएंगे। भाजपा तो उनकी साख और नाम पर चुनाव लड़ रही है। 
उत्तर: मैं यह पूछना चाहता हुं कि क्या प्रधानमंत्री और भाजपा अध्यक्ष के नाम पर नगर निगम चुनाव लड़ा जाना चाहिए। क्या इससे साफ नहीं हो जाता है कि दिल्ली भाजपा के अपने पास कुछ नहीं है। अगर उनके अंदर यह विश्वास ही नहीं है कि वह अपने नाम पर चुनाव जीत सकते हैं तो फिर राजनीति किसलिए की जा रही है। 
प्रश्न: राजनीति की बात जब हो रही है तो आखिर यह क्या राजनीति है कि आपके पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली तक कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। युवा कांग्रेस अध्यक्ष अमित मलिक भी भाजपा का दामन थाम चुके हैं। कई विधायक भाजपा से जुड़ रहे हैं। 
उत्तर: विपक्ष की राजनीति मुश्किल होती है। क्या किसी भी पार्टी में इसलिए रहना चाहिए कि वह सत्ता में है। जब आपको दिल्ली में मंत्री बनाया जाता है। प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाता है। उस समय आपके लिए कांग्रेस एक पार्टी है। जब विपक्ष में बैठने की बात आती है तो आपके लिए यह दल नहीं है। आप विधायक बन रहे हैं तो कांग्रेस ठीक है। उसके बाद कांग्रेस खराब है। विपक्ष की राजनीति में सड़क की धूल फांकनी होती है। यह मुश्किल कार्य है। ऐसे में जो लोग आसानी का जीवन चाहते हैं, वह सत्ताधारी दल से जुड़ना पसंद करते हैं। इस पर कोई क्या कह सकता है। 
प्रश्न: इसका मतलब यह अवसरवादिता है। क्या आपने भाजपा से आए लोगों को टिकट नहीं दिया। आपने भी तो भाजपा में रही पूनम आजाद को कांग्रेस में लिया है। 
उत्तर: हमारे संपर्क में 40—50 भाजपा पार्षद थे। इनके टिकट कट गए हैं। हमनें स्पष्ट तौर पर मना कर दिया। इसकी वजह थी। सबसे पहली वजह तो यही थी कि इनके साथ हम मुददो की लड़ाई रहते रहे हैं। एक विचारधारा का टकराव इनसे हमेशा रहा है। ऐसे में यह क्या राजनीति हुई कि आप एक बार ईधर से जीतो और दूसरी बार उधर से जीतो। विचारधारा महत्वपूर्ण है। दूसरा, हम दूसरे दल से आए लोगों के लिए अपने कार्यकर्ताओं का अवसर क्यों कम करे। जिस कार्यकर्ता ने लंबे समय तक जमीन पर काम किया है उसे कैसे नजरअंदाज करे। पूनम आजाद की बात करें तो उनका समस्त परिवार कांग्रेसी रहा है। उनके ससुर कांग्रेस के नेता थे और बिहार के मुख्यमंत्री भी रहे हैं। 
प्रश्न: पार्टी छोड़ने वाले नेताओं का कहना है कि आप मनमानी कर रहे हैं। उनके समर्थकों को टिकट नहीं दे रहे हैं। यही वजह है कि विरोध बढ़ रहा है। आप किसी की भी बात नहीं सुन रहे हैं। 
उत्तर: क्या सभी 272 सीट पर एक ही व्यक्ति की पसंद से टिकट किसी राष्ट्रीय दल में दिए जा सकते हैं। कम से कम कांग्रेस में ऐसा नहीं होता है। टिकट का वितरण सभी नेताओं से बात करके और उनकी इच्छानुसार दिया गया है। जो लोग इस तरह की बात कर रहे हैं उनके कहने से भी टिकट दिए गए हैं। मेरे द्वारा किसी से बात नहीं करने पर मैं इतना कहना चाहुंगा कि संभव है कि कभी कार्यक्रम की व्यवस्त्ता से किसी से अगर नहीं मिल पाया हुं तो उससे स्वयं संपर्क कर बाद में मैंने मुलाकात की है। मैं कार्यकर्ताओं के लिए हमेशा सुलभ रहा हुं। 

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